जब माँ चली जाती है, तो कानोन इबुकी अपने सौतेले पिता की विकृत इच्छाओं का शिकार बन जाती है। उसके खुरदुरे हाथ उसके कोमल शरीर पर फिरते हैं, उसके उभरते स्तनों को दबाते हैं, जिससे वह उत्तेजना से कांप उठती है। उसका विशाल लिंग उसके अनछुए प्रवेश द्वार को भेदता है, उसकी कौमार्यता को चीरता हुआ, जिससे वह पीड़ा और आनंद से चीख उठती है। उनके नाजायज मिलन से घर मांस से मांस टकराने की आवाज़ों से भर जाता है, क्योंकि वह बार-बार उसके तंग मार्ग को रौंदता है, उसके उपजाऊ गर्भाशय को अपने शक्तिशाली वीर्य से भर देता है जो उसकी कांपती टांगों से नीचे बहता है।